EOD - End of Day




दिन खत्म हुआ, ऑफ़िस से निकलकर तुम घर के लिए ऑटो बुक कराती हो, सांझ ढले आसमां में रंगों की स्याही बिखरी हुई थी, कॉरिडोर में खड़ी तुम शीशों के पार आसमां को निहार रही थी. लिफ्ट आने में कुछ देर है. 
मैं भी वहीं कॉरिडोर में खड़ा नज़रें बचा के तुम्हें देखता हूं. तुमने मुझे नहीं देखा, या नोटिस नहीं किया.

मगर एक बात कहूं, तुमने जो आज ये सब्ज़ रंग का सूट पहना है न, तुम्हारे उजले रंग पर फबता है. तुम जो भी पहनो, जाने क्यूं लगता है जैसे वो लिबास तुम्हें सोच के बना हो. 
तुमने बाल खोले हुए हैं, चेहरे पर हल्का मेकअप, आई लाइनर और न्यूड लिपस्टिक, दिन खत्म होते भी तुम्हें देख कर लगता नहीं कि तुम्हें कोई थकान हुई हो. तुम्हारा चेहरा अभी भी खिला हुआ है, ताज़ा ओस की बूंद की तरह 
इन्हीं ख्यालों में देखा की लिफ्ट आ गई, तुम लिफ्ट में दाखिल हुई, और भी लोग थे, मैने लिफ्ट में तुम्हारे साथ जाने का मौका गंवा दिया, सीढ़ियों से मैं नीचे पहुंचा, चंद सेकंड बाद ही लिफ्ट आ गई, तुम पार्किंग से होते हुए ऑटो में सवार होके निकल गई, मैने आज भी तुम्हारे साथ, तुम्हारे पास होने का मौका गंवा दिया। काश लिफ्ट मैं तुम्हारे साथ होता, तुम्हारी खुली लट को इठलाते हुए देखता, तुम्हारे उजास भरे चेहरे को निहारता, तुमसे सट कर खड़ा होने का मौका मिलता, तुम्हारे उस भीनी महक वाले परफ्यूम की खुशबू से मेरा अन्तस महकता.

- मनोज के.

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